मैं नीर भरी दुख की बदली ! | महादेवी वर्मा

मैं नीर भरी दुख की बदली! . स्पन्दन में चिर निस्पन्द बसा क्रन्दन में आहत विश्व हँसा नयनों में दीपक से जलते, पलकों में

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जो तुम आ जाते एक बार | महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा (२६ मार्च १९०७ — ११ सितंबर १९८७) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के

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[एएमयू] हम टुच्चे हो गए हैं : अशोक वाजपेयी

मुहम्मद नवेद अशरफ़ी | 07 मार्च, 2017 हाल ही में संपन्न हुए तीन दिवसीय अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय (अमुवि) साहित्य महोत्सव (एएमयू लिटरेरी फ़ेस्टिवल) २०१७

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इक़बाल, टैगोर, गाँधी, ब्रेक्सिट और बॉलीवुड पर चर्चा के साथ ‘अमुवि साहित्योत्सव २०१७’ का समापन

अलीगढ़ | ०५ मार्च २०१७ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी डिबेटिंग एंड लिटरेरी क्लब (यूडीएलसी) द्वारा कल्चरल एजुकेशन सेंटर (सीईसी) परिसर में आयोजित तीन

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निगाह-ए-नाज़ ने पर्दे उठाए हैं क्या क्या | फ़िराक़ गोरखपुरी

निगाह-ए-नाज़ ने पर्दे उठाए हैं क्या क्या हिजाब अहल-ए-मोहब्बत को आए हैं क्या क्या जहाँ में थी बस इक अफ़्वाह तेरे जल्वों की चराग़-ए-दैर-ओ-हरम

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