[कविता] [वीडियो] समर शेष है…. (रामधारी सिंह दिनकर)

ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो किसने कहा, युद्ध की बेला गई, शान्ति से बोलो? किसने कहा, और मत बेधो हृदय

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ग़ुस्लख़ाना | सआदत हसन मन्टो (Bathroom | Sadat Hasan Manto)

सदर दरवाज़े के अंदर दाख़िल होते ही सीढ़ियों के पास एक छोटी सी कोठरी है जिस में कभी उपले और लकड़ियां-कोयले रखे जाते थे।

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शर्मसार कर देने वाली घटनाएं | तल्हा मन्नान खान

तल्हा मन्नान ख़ान | 12 जनवरी 2017 सोचिये जिन्हें नागरिकों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है, वे लोग ही नागरिकों के लिए खतरा

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