ये मातम-ए-वक़्त की घड़ी है | फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ठहर गई आसमाँ की नदिया वो जा लगी है उफ़क़ किनारे उदास रंगों की चाँद नय्या उतर गए साहिल-ए-ज़मीं पर सभी खवय्या तमाम तारे

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