[Ph.D.] यूजीसी विनियम 2016 और ए.एम.यू. विनियम एवम अध्यादेश 2017-18

मुहम्मद नवेद अशरफ़ी 

हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने आगामी सत्र 2017-18 के लिए शोध कार्यक्रम (Ph.D.) के लिए विनियम एवम अध्यादेश (Regulations and Ordinance) जारी किये हैं. ये विनियम यूजीसी विनियम 2016 के अंतर्गत जारी किये गए हैं.

क्या कहते है यूजीसी विनियम (UGC Regulation) 2016

यूजीसी विनियम 2016 के अनुसार:

  1. प्रवेश परीक्षा द्विचरणीय (two-stage) होगी जिसमे पहला चरण लिखित होगा और दूसरा मौखिक या साक्षात्कार. (धारा 5.4)
  2. प्रवेश परीक्षा 50% अंक पर अर्हक (qualifying) होगी. (धारा 5.4.1) अर्थात 50 प्रतिशत से कम अंक लाने वालों को अनुत्तीर्ण माना जाएगा.
  3. प्रवेश परीक्षा के पाठ्यविवरण (curriculum) में 50 प्रतिशत शोध पद्धति (research methodology) तथा 50 प्रतिशत विशिष्ट विषय (subject of specialisation) से प्रश्न पूछे जायेंगे. (धारा 5.4.1)
  4. विश्वविद्यालय उन छात्रों के लिए पृथक निबंधन एवम शर्तों (separate terms and conditions) का निर्णय करेगा जिन छात्रों ने यूजीसी-नेट (जे.आर.ऍफ़ सहित), यूजीसी-सी.एस.आई.आर -नेट (जे.आर.ऍफ़ सहित), स्लैट, गेट, शिक्षक अध्येतावृति (teaching fellowship) अथवा जिन्होंने एम.फ़िल पाठ्यक्रम उत्तीर्ण कर लिया है. (धारा 5.1)

क्या हैं ए.एम.यू. विनियम एवम अध्यादेश 2017-18 के प्रावधान:

  1. प्रवेश परीक्षा दो चरणों (two-stage) में विभाजित है. पहला चरण लिखित (written) है जो 80 अंक का है. दूसरा चरण प्रतिदर्शीय एवम साक्षात्कार (presentation and interview) है जो 20 अंक का है. लिखित चरण की अवधि 2 घंटा होगी.
  2. पहले लिखित चरण में दो प्रकार के प्रश्नों का प्रावधान हैं. (1) बहु-विकल्पीय प्रश्न (MCQ) (2) दीर्घउत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions).
  3. बहुविकल्पीय प्रश्नों में शोध पद्धति (30 अंक), सामान्य अंग्रेज़ी (10 अंक), सामान्य ज्ञान (10 अंक) से प्रश्न पूछे जायेंगे. कुल मिलाकर ये लिखित चरण 80 अंको में से 50 अंक पूरे करते हैं.
  4. शेष 30 अंक में विशिष्ट विषय से तीन दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न पूछे जायेंगे.
  5. बहुविकल्पीय प्रश्नों में 25 प्रतिशत ऋणात्मक मूल्यांकन (negative marking) का प्रावधान है.
  6. लिखित चरण की अर्हता (minimum marks to qualify) 50% होगी. अर्थात प्रतिदर्शीय एवम साक्षात्कार (presentation and interview) में प्रवेश हेतु 80 में से न्यूनतम 40 अंक लाना अनिवार्य होगा. ऐसा न करने पर अभ्यर्थी प्रथम चरण में ही परीक्षा से बाहर कर दिया जाएगा.

छात्र क्यूँ हैं असमंजस में?

  1. ए.एम.यू. विनियम जारी होने के बाद छात्र असमंजस में बने हुए जहाँ कुछ तय कर पाना मुश्किल हो रहा है. जहाँ तक यूजीसी द्वारा शोध पद्धति को शामिल करने का प्रश्न है, यह हास्यपद और गैर ज़रूरी दोनों है. (ऐसा क्यूँ है, यह जानने के लिए यह लिंक खोले: awaam.net/ashrafi190717/ ).
  2. सबसे हास्यपद और चिंताजनक यह है कि बहुविकल्पीय प्रश्नों में विशिष्ट विषय (i.e. PG Subject) से कुछ नहीं पूछा जाएगा. विषय से केवल सब्जेक्टिव ही पूछा जाएगा, ऑब्जेक्टिव नहीं.
  3. जब यूजीसी ने लिखित चरण को दो भागों यानि शोध पद्धति और विशिष्ट विषय में 50-50 प्रतिशत में विभाजित रखने का प्रावधान रखा है तो ए.एम.यू में अंग्रेज़ी और सामान्य ज्ञान के कुल 20 अंक यूजीसी विनियम के विपरीत हैं. यह सरासर मनमानी है और छात्रहित के ख़िलाफ़ है.
  4. 25 प्रतिशत का ऋणात्मक मूल्यांकन और उस पर 80 में से 40 अंक लाने की बाध्यता बेहद मूर्खतापूर्ण है. 25 प्रतिशत ऋणात्मक मूल्यांकन के बारे में यूजीसी विनियम ख़ामोश है, वहां इसका कोई ज़िक्र नहीं है. लेकिन 2014 के बाद ए.एम.यू. ने ऋणात्मक मूल्यांकन को शोध प्रवेश परीक्षा में लागू किया गया है. इसका दुष्परिणाम यह होगा कि ऋणात्मक मूल्यांकन के रहते 50 प्रतिशत अंक हासिल करना बहुत मुश्किल होगा और विभागों में सीटें खाली रह जाएँगी, जैसा कि पिछले सत्र में कई विभागों में केवल 35 अंक लाना भी मुश्किल हो गया था और सीटें खाली रह गयी थी. पिछले सत्र में तो शोध पद्धति भी नहीं थी, केवल विषय ही था. इस बार विषय भी नहीं है, ऋणात्मक मूल्यांकन ज्यों का त्यों बना हुआ है और साथ में अंग्रेज़ी और सामान्य ज्ञान भी है.
  5. जबकि यूजीसी ने निर्देश दिए हैं कि एम.फ़िल और नेट उत्तीर्ण करने वालों के लिए अलग नियम बनाये जाएँ. इस पर ए.एम.यू. ने एम.फिल और नेट उत्तीर्ण करने वालों को मुक्त (एक्ज़ेम्प्ट) नहीं रखा है. जब शोध पद्धति पर इतना जोर दिया जा रहा है तो उन लोगो को विशिष्ट दर्जा मिलना चाहिए जो एम. फ़िल उत्तीर्ण कर चुके हैं.
  6. यूजीसी के विनियम लगभग हर संसथान पर लागू हो रहे हैं. विनियम के अनुसार, विनियम ‘ऐसे प्रत्येक विश्वविद्यालय पर लागू होंगे जो किसी केन्द्रीय अधिनियम, प्रांतीय अधिनियम अथवा किसी राज्य अधिनियम के तहत स्थापित अथवा निगमित हैं, तथा ऐसा प्रत्येक संबद्ध महाविद्यालय एवं जो, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अधिनियम, 1956 की धारा 3 के तहत मानित विश्वविद्यालय संस्थान है’. प्रश्न यह है कि केन्द्रीय विश्विद्यालय जैसे दिल्ली विश्विद्यालय, जवाहरलाल नेहरु विश्विद्यालय में इन नियमों को लागू नहीं किया जा रहा है. तो फिर ए.एम.यू. पर यह कैसी बाध्यता है.
  7. अंतत:, सब्जेक्टिव प्रश्नों में चॉइस होगी या नहीं, इसको लेकर भी छात्रों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

तथ्यों की अधिक जानकारी के लिए यह लिंक अवश्य पढ़ें:

www.awaam.net/ashrafi190717/

Naved Ashrafi

Naved Ashrafi

Naved Ashrafi earned his Botany Honors and was awarded Gold Medal in Masters in Public Administration at the Aligarh Muslim University. He is doctoral fellow in Public Administration at the Department of Political Science, AMU.